Meghadutam Sampurna (मेघदूतम् सम्पूर्णः)
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Dr. Dhananjay Kumar Tripathi - Sanskrit & Hindi
Meghadutam Sampurna (मेघदूतम् सम्पूर्णः)
मेघदूतम् सम्पूर्णः (Meghadutam Sampurna) विश्व का कौन ऐसा साहित्यरसिक है जो महाकवि कालिदास को नहीं जानता ? प्रस्तुत मेघदूत कालिदास का एक खण्डकाव्य (गीतिकाव्य) है जो वाल्मीकि रामायण के ‘हनुमान् के दौत्य’ के आधारभित्ति पर स्थित है। विरही यक्ष का सन्देशवाहक बनकर मेघ उसकी वल्लभा के पास अलकापुरी को जाता है।
मेघदूतम् – पूर्व और उत्तर भाग से संयुक्त मेघदूत खण्डकाव्य और गीतिकाव्य हैं। इसमें कुवेर के शाप से अस्तङ्ङ्गमित महिमावाले किसी कामी यक्ष की विरहावस्था का चित्रण है। वाल्मीकि रामायण के हनुमत्-दौत्य पर आधारित यह खण्डकाव्य दूतकाव्य का प्रवर्तक है इसी के आधार पर विश्व के अन्य दूतकाव्य लिखे गये। पूर्वमेघ में रामगिरि (पर्वत) से लेकर अलका तक के भूभागों, देशों, नागरिकों, नदियो, पहाड़ों आदि का वर्णन आगे किया जाएगा। उत्तरमेघ में यक्षिणी का वर्णन, उसकी विरहावस्था का वर्णन और यक्षिणी को कथनीय सन्देश आदि उपनिबद्ध हैं।l इस खण्डकाव्य को कोई भी सहृदय पढ़कर वाष्प से रुँधे गलेवाला हो जाता है। इस काव्य में महाकवि को प्रौढ शैली दीख पड़ती है। इससे स्पष्ट होता है कि काव्यपरम्परा में कालिदास की यह अन्तिम रचना है।
Author : Dr. Dhananjay Kumar Tripathi
Publisher : Bharatiya Vidya Sansthan
Language : Sanskrit & Hindi
Edition : 2016
Pages : 274
Cover : Paper Back
ISBN : -
Size : 12 x 3 x 19 ( l x w x h )
Weight :
Item Code : BVS 0129